Tuesday, 31 May 2011

VISHW VASUDHA KA SHRINGAAR GAU..........

                  हमारी संस्कृति की नींव का आधार  ही है - गौ, गुरु, गीता, गंगा, गायत्री. कहते हैं , जिसके पास ये पञ्च विभूतियाँ हों, वह जगत में और परलोक में पूज्य है.

                 गौ सेवा, गौ-पालन के कारण ही हम पुरे विश्व पटल पर अजेय थे. गौ पालन के कारण ही पूरी दुनिया में हमें विश्व गुरु माना जाता था. आज जबकि पूरी दुनिया में गौ पालन एक आन्दोलन  का रूप ले चूका है, हम अन्य देशों की तुलना में काफी पिछड़  चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क, अमेरिका  आदि अन्य यूरोपीय देशों में तो आज गौ पालन व्यावसायिक रूप ले चूका है. गौ पालन के कारण ही वे देश आज हमसे आर्थिक रूप से सबल, सफल, और संपन्न राष्ट्र बन कर उभर रहे हैं. उनकी तुलना में हम कहीं भी नहीं हैं. पूर्व में हमारे घर की समृद्धि , ख्याति एवं  यश का पर्याय गौ पालन ही था. परन्तु सम्प्रति स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी है. आज हजारों घरों पर एक गाय मिलेगी. 
                  - गौ सेवा से अनेक लाभ हैं :-
  • गाय का गोबर जैविक खाद का सर्वोत्तम साधन बनता जा रहा है. विज्ञानं ने भी इसे सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया है.
  • गौ दुग्ध :- कॉफ़ी , चाय, पनीर, खोया, लस्सी, छाछ, माखन, घी, दही ,आज यदि बाज़ार से हट जाएँ तो समस्त पार्टियाँ फीकी पड़ जाएँगी.
  • गौमूत्र :- कैंसर जैसे असाध्य रोगों में गौमूत्र का अचूक प्रयोग आज धड़ल्ले से हो रहा है.
  • मृत गौ शरीर :- मृत्योपरांत गौ- देह को जमीन में गाड़ देने के बाद अति उपयोगी खाद बन जाता है. एक गौ की देह की खाद एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होती है.
  • मृत्योपरांत गौ के चमड़े का प्रयोग जूता, वस्त्रादि बनाने के काम आते हैं.
  • गौ-सिंग :- इसे जमीन में गाड़ देने से उसके आसपास चतुर्दिक में लगभग एक कट्ठा भूमि अति उर्वर हो उठती है.
  • इन सबके अतिरिक्त अनेक प्रयोग एवं लाभ -
  • गाय के गोबर के पास परमाणु विकिरण निष्क्रिय हो जाता है. गौ को लक्ष्मी मानने के पीछे यही तथ्य एवंम सत्य निहित  है. गौ पालन कर लक्ष्मी को ही आमंत्रित करते हैं.
  • गौ के निकट रहने वालों को -उसके शरीर से उत्सर्जीत ऊष्मा में अनेक रोगों का शमन करने की क्षमता होती है. इसके निकट रहने वाले कई अनिष्ट ग्रहों से बचते हैं.
  • गाय समीपवर्ती क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव दिखाती है. १०० फीट के आसपास का क्षेत्र रोग निरोधक हो जाता है. ऐसी उसकी प्रकृति - प्रदत्त रचना है.
  • गौ के कंधे में इतनी शक्ति है की वह सूर्य से आती शुभ किरणों -रश्मियों को अवशोषित  कर अपने आस-पास के लोगों पर परावर्तित कर देती है.

                    जब तक हमारे देश में गौ पूजन ,सेवा होती थी, हमारा देश सर्वतोमुखी विकास कर विश्व मानचित्र पर विश्वगुरु होने का गौरव रखता था. आज स्थिति विपरीत है. हम सभी गौ पालन करें अथवा करने में सहयोग करें   - पुण्य के भागी बनें. ऐसी ही हमारी आपसे करबद्ध प्रार्थना है.

                  आज चारा और चारागाह के अभाव में वे कसाईखाने   में कतारबद्ध खड़ी हैं. संकल्प लें और इनकी रक्षा करें - आखिर  गौ हमारी माता है.

                                                                                                                           ....................  साधिका .......................

SIDHAASHRAM VANI.......

"समस्त चैतन्य मंडलों को समस्त चैतन्य शक्तियों का-अन्शियों का सत-सत प्रणाम" !!

Sunday, 29 May 2011

PRABHU MILAN



                  वेदना की वेदी पर टूटते वादे,

                                 और भवितव्यता के पथ पर

           बिखरते अरमानों की रंगोली,

                                महाशंखनाद इस उल्लास के

           कराते यादें वापसी की,

                               सुनो! पनिहारिनों ,सुनो पनिहारिनों,

           लौटना है उस पार ,परम पास,

                               सांझ ढल चुकी है.

           पक्षी सुदूर आकाश में ,

                               उड़ते लौट रहे हैं.

           आकाश का तिलक भी,

                              क्षितिज में धूमिल हो  रहा है.

           देखो चहुँ ओर तमाकाश बिखरता,

                              और तुम्हारी वापसी पर

           फलक इतने तारों-सितारों,

                              के साथ स्वागतार्थ खड़ा है.
         घनी अँधेरी है रात,

                             फिर भी शीतलता है,
       
         क्योंकि महामिलन शीघ्र ही होनेवाला है.

                                                           :- हिमालय के योगी.


            

          

Friday, 27 May 2011

LOVE WITH NATURE ONLY SECURE TO US FROM NATURE'S DISASTERS.....

                        प्रकृति के प्रति हमारा जितना अगाध प्रेम होगा उतना ही हम प्राकृतिक आपदा से बचे रह सकेंगे.और इसका कोई उपाय नहीं है.हम आखिर क्या कर रहे हैं अपनी प्रकृति को बचने के लिए , या इसकी हिफाज़त के लिए, शायद कुछ भी नहीं.सिर्फ "ग्लोबल वार्मिंग" के नारे सारे विश्व  में गूंज रहे हैं. क्या इसका कुछ भी फायदा हमने या हमारी प्रकृति ने महसूस किया है. प्रकृति का तो दोहन बदस्तूर जारी ही है, कहाँ हम कुछ कर पा रहे हैं.....

                         कभी बिल्डिंग बनाने के नाम पर,तो कभी लम्बी सड़क लाइनें  बनाने के नाम पर,तो कभी अय्याश होटल और माल्स को बनाने के नाम पर, हम हर रोज लाखों पेड़ों की बलि देते आ रहे हैं.चाहे बात शुद्ध वायु की हो या शुद्ध जल की , आज के परिवेश में सबकुछ प्रदूषित हो चूका है. और इसके सिर्फ और सिर्फ जिम्मेद्दार हम -आप ही हैं.

                        ज़रा बताएं, इन सब उपलब्धियों को पा कर  हमें क्या मिला, जरा सी  शानोशौकत ,और ढेर सारी पीढ़ियों तक की परेशानियां.क्या कभी हम या हमारी आने वाली पीढ़ी हमे माफ़ कर पायेगी.

                    एक तरफ तो हम बात करते हैं अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की, वहीँ दूसरी और बेहतर भविष्य के नाम पर प्रकृति को दोहे जा रहे है. क्या प्रकृति हमारे इस जग्घंन्य अपराध को कभी क्षमा कर पायेगी? क्या आप  प्रकृति  होते तो माफ़  कर पाते?

                   हमें एक सिरे से फिर से शुरुआत करनी चाहिए. ये प्रकृति है तभी हम सांस ले रहे हैं,खा रहे हैं,गा रहे हैं. हमारी इस धरा को और कुछ भी नुकसान हो इस से पहले ही हमे सचेत हो जाना चाहिए.और होना भी चाहिए, आखिर ये हमारी प्यारी पृथ्वी है.....क्यूँ...है न.....

                    चलिए,आज से  हम सब कुछ  प्रण लेते हैं.............
  1. आज से किसी भी पेड़ -पौधों  को यथा-संभव काटने नहीं देंगे.
  2. अपने घर एवं आस पास के सभी जगहों में उचित स्थान पे वृक्षारोपण  करेंगे.
  3. हमारे आस पास सिर्फ हरियाली हो.
  4. सुन्दर फुल-पौधों से हमारी वाटिका महके.
  5. फलदार और  छायादार वृक्ष हमारे आज और कल के लिए बहुत काम आएगी,इसे भी लगायें.
  6. घर या ऑफिस जहाँ भी हो , गमलो में भी पौधे लगायेंगे.
  7. हर साल एक निश्चित संख्या में पौधे लगायें एवं उनकी सेवा का प्रण लें.
  8. यथासंभव पानी का उपयोग करेंगे,व्यर्थ इस्तेमाल नहीं करेंगे.
  9. जलस्त्रोतों के आस पास गंदगी नहीं फैलाएँगें.समय समय पर सफाई का ध्यान रखेंगें.
  10. किसी के जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर एक सुन्दर फूल के पौधे को भेंट दें,इसकी हिफाज़त व सेवा की जिम्मेदारी अगले की होगी.
  11. और भी बहुत सी बातें आप खुद अपने विचार से कर सकते हैं.
               ध्यान रहे, ये बातें सिर्फ लिखने के लिए  यहाँ नहीं  डाली जा रही हैं, यह पूरी सच्चाई  है की यदि जो भी व्यक्ति आज के समय में प्रकृति को अनदेखा करेगा, कल प्रकृति भी उसे अनदेखा करेगी.
                                                                                   
                                                                  ............  साधिका ..........

Thursday, 26 May 2011

Thursday, 19 May 2011

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Sunday, 1 May 2011

ETERNAL MESSAGE TO THE HUMANITY

"ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः "

यह गुरुमंत्र स्वयं यज्ञ की अग्नि है ,इसमें शिष्य स्वयं को आहूत करे.अधिक से अधिक जप करें  और गुरु को  समर्पित करें . परन्तु इस गुरु मंत्र से कभी हवन  न करें.

                                                                            .......दादा गुरुदेव.....

WELCOME TO GODLY MIRACLES ENDOWED UPON US.