हमारी संस्कृति की नींव का आधार ही है - गौ, गुरु, गीता, गंगा, गायत्री. कहते हैं , जिसके पास ये पञ्च विभूतियाँ हों, वह जगत में और परलोक में पूज्य है.
गौ सेवा, गौ-पालन के कारण ही हम पुरे विश्व पटल पर अजेय थे. गौ पालन के कारण ही पूरी दुनिया में हमें विश्व गुरु माना जाता था. आज जबकि पूरी दुनिया में गौ पालन एक आन्दोलन का रूप ले चूका है, हम अन्य देशों की तुलना में काफी पिछड़ चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क, अमेरिका आदि अन्य यूरोपीय देशों में तो आज गौ पालन व्यावसायिक रूप ले चूका है. गौ पालन के कारण ही वे देश आज हमसे आर्थिक रूप से सबल, सफल, और संपन्न राष्ट्र बन कर उभर रहे हैं. उनकी तुलना में हम कहीं भी नहीं हैं. पूर्व में हमारे घर की समृद्धि , ख्याति एवं यश का पर्याय गौ पालन ही था. परन्तु सम्प्रति स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी है. आज हजारों घरों पर एक गाय मिलेगी.
- गौ सेवा से अनेक लाभ हैं :-
- गाय का गोबर जैविक खाद का सर्वोत्तम साधन बनता जा रहा है. विज्ञानं ने भी इसे सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया है.
- गौ दुग्ध :- कॉफ़ी , चाय, पनीर, खोया, लस्सी, छाछ, माखन, घी, दही ,आज यदि बाज़ार से हट जाएँ तो समस्त पार्टियाँ फीकी पड़ जाएँगी.
- गौमूत्र :- कैंसर जैसे असाध्य रोगों में गौमूत्र का अचूक प्रयोग आज धड़ल्ले से हो रहा है.
- मृत गौ शरीर :- मृत्योपरांत गौ- देह को जमीन में गाड़ देने के बाद अति उपयोगी खाद बन जाता है. एक गौ की देह की खाद एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होती है.
- मृत्योपरांत गौ के चमड़े का प्रयोग जूता, वस्त्रादि बनाने के काम आते हैं.
- गौ-सिंग :- इसे जमीन में गाड़ देने से उसके आसपास चतुर्दिक में लगभग एक कट्ठा भूमि अति उर्वर हो उठती है.
- इन सबके अतिरिक्त अनेक प्रयोग एवं लाभ -
- गाय के गोबर के पास परमाणु विकिरण निष्क्रिय हो जाता है. गौ को लक्ष्मी मानने के पीछे यही तथ्य एवंम सत्य निहित है. गौ पालन कर लक्ष्मी को ही आमंत्रित करते हैं.
- गौ के निकट रहने वालों को -उसके शरीर से उत्सर्जीत ऊष्मा में अनेक रोगों का शमन करने की क्षमता होती है. इसके निकट रहने वाले कई अनिष्ट ग्रहों से बचते हैं.
- गाय समीपवर्ती क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव दिखाती है. १०० फीट के आसपास का क्षेत्र रोग निरोधक हो जाता है. ऐसी उसकी प्रकृति - प्रदत्त रचना है.
- गौ के कंधे में इतनी शक्ति है की वह सूर्य से आती शुभ किरणों -रश्मियों को अवशोषित कर अपने आस-पास के लोगों पर परावर्तित कर देती है.
जब तक हमारे देश में गौ पूजन ,सेवा होती थी, हमारा देश सर्वतोमुखी विकास कर विश्व मानचित्र पर विश्वगुरु होने का गौरव रखता था. आज स्थिति विपरीत है. हम सभी गौ पालन करें अथवा करने में सहयोग करें - पुण्य के भागी बनें. ऐसी ही हमारी आपसे करबद्ध प्रार्थना है.
आज चारा और चारागाह के अभाव में वे कसाईखाने में कतारबद्ध खड़ी हैं. संकल्प लें और इनकी रक्षा करें - आखिर गौ हमारी माता है.
.................... साधिका .......................
