वेदना की वेदी पर टूटते वादे,
और भवितव्यता के पथ पर
बिखरते अरमानों की रंगोली,
महाशंखनाद इस उल्लास के
कराते यादें वापसी की,
सुनो! पनिहारिनों ,सुनो पनिहारिनों,
लौटना है उस पार ,परम पास,
सांझ ढल चुकी है.
पक्षी सुदूर आकाश में ,
उड़ते लौट रहे हैं.
आकाश का तिलक भी,
क्षितिज में धूमिल हो रहा है.
देखो चहुँ ओर तमाकाश बिखरता,
और तुम्हारी वापसी पर
फलक इतने तारों-सितारों,
के साथ स्वागतार्थ खड़ा है.
घनी अँधेरी है रात,
फिर भी शीतलता है,
क्योंकि महामिलन शीघ्र ही होनेवाला है.
:- हिमालय के योगी.

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